Saturday, October 15, 2022

किसके भरोसे बिहार ?

बिहार का एक सच यह भी है

          सिद्धार्थ को बिहार के गया में ज्ञान की प्राप्ति हुई, बन गए महात्मा बुद्ध।  पूर्वी एशिया का अधिकांश देश बुद्धमय हो गया। श्रीलंका से चीन और जापान तक उसका प्रकाश फैला, बिहारी के काम न आया। 

बिहार से ही जैन के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर ने दुनिया को  पंचशील का सिद्धांत बताया-अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) ,ब्रह्मचर्य। बन गए भगवान महावीर। बिहार इससे अछूता रह गया। 

जिस बिहार के पाटलिपुत्र(पटना) को चन्द्रगुप्त और सम्राट अशोक ने  राजधानी बनाकर उत्तर में हिन्दुकुश, तक्षशिला की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी, सुवर्णगिरी पहाड़ी के दक्षिण  मैसूर तक तथा पूर्व में आज के म्यांमार, बांग्लादेश तक और पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान, बलूचिस्तान तक शासन कर लोहा मनवाया, आज वह पाटलिपुत्र की धरती अपने पर क्यों रो रही है?

सिख पंथ के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह का आविर्भाव भी इसी बिहार में हुआ, पंजाब के साथ देश-विदेश में उनके ज्ञान का प्रकाश फैला, लेकिन बिहार का अंधेरा दूर नहीं हो पाया। 

मोहनदास करमचंद गांधी ने बिहार के चम्पारण से सत्याग्रह का आंदोलन चलाया, सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया, देश के आजादी की नींव रखी, अंग्रेजों की सत्ता हिल गई, देश को आजादी मिल भी गई, बन गए महात्मा। बिहार जस का तस अपनी जगह खड़ा रहा, गांधी का सत्य और अहिंसा का पाठ भी बिहार के काम न आया। 

लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल के खिलाफ बिहार से बिगुल फूंक संपूर्ण क्रांति का आगाज कर देश और प्रदेश की सरकारें बदल दी, लेकिन उस क्रांति से उपजे नेता, पिछले बत्तीस वर्षों से राज कर रहे हैं, बिहार को क्या मिला, यक्ष प्रश्न है?

 और तो और बिहार के पद्मश्री बिंदेश्वर पाठक ने पूरे देश को सुलभ शौचालय का कॉन्सेप्ट दिया। साफ-सफाई में यह मील का पत्थर साबित हुआ, लेकिन इस कॉन्सेप्ट का बिहार के शहरों की सफाई में योगदान पर भी प्रश्न चिन्ह है। इतना ही नहीं देश का शायद ही कोई राज्य हो, जहां बिहारी आई.ए.एस., आई.पी.एस.कानून व्यवस्था को  सुधारने में अपना लोहा न मनवा रहा हो, लेकिन बिहार की कानून व्यवस्था, प्रश्न के दायरे में ही है? कहा जाता है कि बिहारियों में न तो होम सिकनेस होता है और न ही किसी काम को करने में उसे कोई हिचक होती है, फिर भी रोजी-रोटी के लाले पड़े हैं और दूसरे राज्यों के भरोसे जीविका की तलाश की जाती रही  है। बिहार में न मानव संसाधन की कमी है, न उपजाऊ मिट्टी या पानी की। कमी कहां रह गई? यह सोचने की बात है। दूसरे राज्यों में बिल्डिंगें बिहारी बनवा रहा है, साफ-सफाई का ध्यान बिहारी रख रहा है, खेतों में काम कर उनके गोदामों को अनाज से बिहारी भर रहा है, अधिकांश राज्यों का शासन-प्रशासन भी बिहारी देख रहा है, तो बिहार पिछड़ा क्यों रह गया? आखिर बिहार को किसकी नजर लग गई। हम बिहारियों ने दुनिया को राह दिखाया, अपने लिए राह न बना पाये। पढ़ा था 'दीपक तले अंधेरा' नाम का एक मुहावरा भी होता है। हम बिहारियों ने तो इसे सिद्ध करके दिखा दिया। पता नहीं अब किस आका के आसरे बिहार और बिहारियों का भाग्य टिका है? क्योंकि पिछले पचहत्तर वर्षों में हमने कई एक्सपेरिमेंट किये, नतीजा ढाक के तीन पात। अब तो पचहत्तर वर्षों में समय-समय पर जनता द्वारा नकारी गईं सरकारें ही साथ-साथ हैं। फिर भी उम्मीद की आस शेष है? 

✍️S.P.SINGH

Thursday, September 22, 2022

नीतीश-चिराग के लिए तेजस्वी बनेंगे कांटा रोकना मुश्किल, आख़िर क्यों ?

 

बिहार में हाल के दिनों में बदले सियासी समीकरण ने कई लोगों को सोंचने पर मजबूर कर दिया तो कई बड़े बदलाव देखने को मिले। लेकिन जो बदलाव राजद सुप्रीमो लालू यादव के छोटे बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव में देखने को मिली है उसकी शायद किसी ने कल्पना नहीं थी। गांवों में कहते हैं न "बेकरों-बेरोजगारों को ठीक करना है तो उसके कंधें पर जिम्मेदारी का बोझ डाल दो (शादी करा दो) वह खुद-बखुद ठीक हो जाएगा। शायद यहीं जिम्मेदारी ने तेजस्वी को पिछले कुछ दिनों में बदल दिया है। कैसे ? इसे समझते हैं।

बिहार में NDA सरकार में लंबे वक्त तक नेता प्रतिपक्ष रहने वाले तेजस्वी यादव वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं साथ ही कुछ महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं इतना ही नहीं लालू यादव के बाद राजद को मजबूती देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रहे हैं। इसी के मद्देनजर तेजस्वी यादव ने बुधवार को पार्टी के लिए राज्य परिषद की बैठक की जिसमें तेजस्वी ने घोषणा करते हुए बताया कि राजद में जिलाध्यक्ष ही सबसे मजबूत पद होगा।

जिला में होने वाले किसी भी कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष ही उसका नेतृत्व करेगा।
अगर उस कार्यक्रम में कोई विधायक या मंत्री पहुंचता है तो वह जिलाध्यक्ष के पीछे खड़ा होगा ना की उसके आगे। तेजस्वी के इस फैसले का भले भी पार्टी के नेता और रौब झाड़ने वाले पार्टी के विधायक सही नहीं मान रहे हों लेकिन इस फैसले का परिणाम आगे बहुत बेहतर होने वाला है। ये साफ है कि तेजस्वी यादव ने अपने पार्टी के दम को बखूबी समझ लिया है इसलिए पार्टी जमीनी स्तर से मजबूत करना चाहते हैं ताकी जिला स्तर के अधिकारियों के सहारे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को एक्टिव कर सकें, क्योंकि कोई भी पार्टी बिना कार्यकर्ताओं के मजबूती से आगे नहीं बढ़ सकती है।

बिहार में नई सरकार के घठन के बाद से लगभग बिहार की पूरी जिम्मेदारी


तेजस्वी यादव के कंधे पर ही हैं क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2024 के चुनाव के लिए विपक्ष को एकजुट कर रहे हैं। तो बड़े फैसले तेजस्वी ही कर रहे हैं, चाहे वह अपने स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर अस्पतलों का दौरा करना हो या इलाके बाद फ्री में मिलने वाले दवाओं की पूर्ण आपूर्ति के आदेश।

बिहार में लालू-राबड़ी (माता-पिता)सरकार के दौरे को जंगलराज और चारा घोटाले के आरोपी का पुत्र होने का दंश झेल रहे तेजस्वी यादव ने अपने लगाम से बाहर रहने वाले मंत्रियों और विधायकों को वश में करने के लिए कई बड़े आदेश जारी किये हैं। जैसे अधिकारियों से समन्वय बनाकर काम करना, बेतूके बयानबाजी नहीं करना के साथ ही विवादों से दूर रहना। ये अलग बाद है कि कृषि मंत्री सुधाकर सिंह आपे से बाहर दिखे और चर्चे में रहे।

तेजस्वी यादव ने अपने मंत्रियों को अपने विभागों की विशेष देखभाल के साथ ही सभी कार्यों को सोशल मीडिया में पब्लिकली करने के आदेश दिए हैं ताकी जनता के बीच सरकार के कार्यों के साथ राजद के कार्यों को जनता तक पहुंचाया जा सके। इतना ही सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबित तेजस्वी ने सोशल मीडिया (IPRD) को भी सख्त किया है और रेलैया पत्रकारों पर नज़र रखने के आदेश दिया है। ताकि कोई सरकार के ख़िलाफ़ झूठी ख़बरें या अफवाह ना उड़ाये।

अब तेजस्वी को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं। यहीं तेजस्वी यादव है जो बिहार विधानसभा चुनाव में एक दिन में 12 से 15 चुनावी रैलियां करते थे। जिसका परिणाम ही रहा तेजस्वी और राजद मजबूती के साथ आगे बढ़े और बिहार में मजबूत विपक्ष बनकर बैठे। और तो और तेजस्वी यादव ने बिहार में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी बखुबी निभाई है ये अलग बात है कि कोरोना काल में ट्विटर बाबू बनने का भी सौभाग्य उन्होंने लिया है। तो बिहार में बाढ़ की विभिषिका के बीच फरारी भी तेजस्वी यादव ने ही दर्ज है।


लेकिन शादी के बाद से कहें या बिहार में सत्ता की कुर्सी की जिम्मेदारी मिलते ही तेजस्वी यादव में बदला से इंकार नहीं किया जा सकता है। तेजस्वी की अगर यहीं स्थिति यहीं रही और आने वालों दिनों में तेजस्वी ने खुद को और संभाला तो ये तय है कि बिहार में लालू यादव के बाद तेजस्वी ही बिहार में जनता के दिलों पर राज कर सकते हैं। क्योंकि बिहार में कई युवा चेहरे हैं लेकिन चिराग और तेजस्वी यादव को सौगात में मिली सियासत में तेजस्वी यादव ज्यादा असरदार दिख रहे हैं। और तेजस्वी का यहीं असर JDU, नीतीश और चिराग पासवान को ले डूबेगी। 

 

Friday, September 2, 2022

झारखंड में BJP के लिए अंकिता बस बहाना है ?

झारखंड के दुमका में अंकिता मर्डर केस के बाद पूरे देश में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। तो दूसरी तरफ़ हर एक व्यक्ति अंकित के लिये न्याय की मांग कर रहा है और आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की बात कर रहा है ताकि दुबारा कोई लड़की अंकिता की तरह तड़प कर ना मारे। वहीं इन सब से इत्तर बीजेपी इस मामले के सहारे ही सही प्रदेश में अस्थिरता की संकट झेल रही सोरेन सरकार को धराशाई कर मानो कुर्सी पर कब्ज़ा करने की हर जुगत में जुटी है।

तभी तो घटना के बाद सरकार और उसके आलाधिकारी मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई में   जुटे हैं। लेकिन बीजेपी नेता इसे सरकार की विफलता बता राजनीतिक रोटी सेकने में।https://twitter.com/ChawlaJainender/status/1564808123105570816?t=HUvsuGtVnguktH1mdR_JfQ&s=19

अंकिता के परिजनों को हर संभव साथ देने का भरोसा देने वाले BJP के नेता जो आज सरकार पर आरोप लगा रहे हैं क्या ये भूल गए की संविधान में सरकार के साथ विपक्ष की भी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। माना कि सरकार की आंखे अंकिता को ना देख पाई हो, मृत सैया पर पड़ी अंकिता की आवाज़ ना सु पाई हो। लेकिन आवाज़ आप तक गई तो आपने क्यों नहीं सहायता पहुँचाई ? क्या आप भी राजनीति के लिए अंकिता के मौत का इंतज़ार कर रहे थे, या चुनावों में खरबों खर्च कर आसमान में गुलेटिया मरने वाले आपके हेलीकॉप्टर की तेल खत्म हो गई थी ? नहीं साहब! आपको तो जाननीति करनी थी और ये हम नहीं कह रहे बाकी BJP के इस डेलिगेशन में शामिल और सरकार पर आज गंभीर आरोप लगा रहे BJP नेता कपिल मिश्रा की झारखंड की आखिरी दो यात्राएं चिल्ला-चिल्ला कर कह रही है।

भरोसा नहीं तो पहले इन तस्वीरों को देखिए और ध्यान से संवाद को सुनिये....

 https://fb.watch/fhqdJ_jZjL

कुछ याद आया ? नहीं ! कोई बात नहीं हम आपको समझाते हैं। यह तस्वीर भी कपिल मिश्रा के झारखंड दौरे की ही है। हजारीबाग के बरही में इसी साल सरस्वती मूर्ति विसर्जन के दौरान 2 समुदायों में हुई झड़प के बाद रूपेश पांडे की मॉब लॉन्चिंग में हत्या हो गई थी। उसी दरम्यान रूपेश के परिजनों से मिलने पहुंचे कपिल मिश्रा को रांची एयरपोर्ट पर झारखंड पुलिस दें हिरासत में ले लिया था और लगभग 5 घंटे के बाद वापस दिल्ली भेज दिया था। उस वक्त कपिल मिश्रा ने झारखंड मैं आने के बाद रूपेश पांडेय की मां से मिलने का भरोसा दिया था लेकिन साहब आज भूल गए रूपेश की माँ से मिलना। क्योंकि मुद्दा जो नया मिल गया था।

मतलब साफ है झारखंड में BJP को हिंदुत्व की अंधी में बहाना है और सत्ता की कुर्सी पर धाक जमाना है। हालांकि इन आरोपों के बाद BJP के कई नेता मुझसे नाराज़ होंगे। लेकिन उनके सवालों का जवाब BJP नेता कपिल मिश्रा के ट्विटर पर मौजूद है।

सिस्टम को हिंदुत्व ECO सिस्टम बनने में जुटे कपिल ही आख़िर क्यों दिल्ली से दौरा कर  झारखंड पहुँचे। क्या झारखंड, बिहार या उत्तर प्रदेश में BJP में कोई कद्दावर नेता नहीं है। लेकिन सवाल नेताओ का नहीं मुद्दों का है। जब अंकिता की हत्या और हजारीबाग के रूपेश की हत्या का आरोप किसी ख़ास समुदाय  पर लगा है, जिसे भुनाने में मानो कपिल मिश्रा BJP के लिए ब्रह्मास्त्र बन गए हैं तभी तो उन्हें भेजा जाता है। वरना BJP सच में संवेदनाओं को समझती तो अंकिता के परिजनों से मिलने का साथ ही... हजारीबाग के उस मां की पथराई आंखों की आंसू भी पोछने BJP नेता जरूर जाते जो अपने बेटे के गम में पिछले 6 महीने से सुधबुध खो चुकी है और BJP नेता कपिल मिश्रा के आने का इंतज़ार कर रही है।

सच में BJP के पास संवेदना होती तो रांची में BJP नेत्री के करतूतों को झेल रही उस नौकरानी की हाल भी जानने की कोशिश करते जो आज अस्पताल में ज़िन्दगी और मौत से जूझ रही है।

लेकिन BJP के लिए अंकिता तो बहाना है, यहां जाति-धर्म के नाम पर वोट बनाना है। खुद सरकार में जहां हैं चुप रहते हैं, लेकिन विपक्ष में होतो तो सरकार की विफ़लता हर मुद्दे पर सिद्ध कर ख़ुद कुर्सी तक पहुँचने का रास्ता बनाना है।

✍️ किशोर

 

Wednesday, July 20, 2022

कहाँ गएं बत्तख़ मियां ?

बचपन में हमने सिद्धार्थ की कहानी पढ़ी थी जिसमें लिखा था "मारने वाला से ज्यादा बचाने वाले का अधिकार होता है" लेकिन आज इतिहास को बदलने, ग़लत इतिहास बताने/पढ़ाने का दावा करने वाली सरकार और रोज-रोज TV डिबेट में चिल्लाने वाले BJP के नुमायनदे भी भूल गए हैं कि वह क्या कर रहे हैं ?

दरअसल लंबे वक्त बाद आज यात्रा के दौरान जिला मुख्यालय (मोतिहारी, अब बापूधाम मोतिहारी) आने का मौका मिला। स्टेशन के पीछे (PF-1) चाय पीने गया तो स्टेशन का जीर्णोद्धार किया हुआ पाया। कई चीजें बदल गई थी कई नई स्थापित हो गई थी। इस बदलाव में मैंने बत्तख़ अंसारी की आख़िरी निशानी नहीं देखा। चायवाले से पूछा तो उन्होंने व्यंगात्मक अंदाज़ में बोला 'बत्तख़ मियां मर गए' मैंने पूछ 'ओ ज़िंदा कब थे ?' 'मरने के बाद कुछ दिन तक जिंदा थे, फिर मर गए' चायवाले ने जवाब दिया। 

             चायवाले का जवाब सुनकर मुझे याद आया आज़ादी का अमृत महोत्सव और उसके तहत देश के युवाओं के रग- रग में देशभक्ति की आग डालने वाले हर घर तिरंगा अभियान की जिसकी तैयारी सरकार तेज़ी से कर रही है। तो इस तैयारी में सत्तापक्ष के साथ ही विपक्ष भी खड़ा है क्योंकि विरोध किया तो देशद्रोही का तंगमा सत्तासीन संस्कारी पार्टी BJP लटका देगी। लेकिन उन सारे कार्यक्रमों को आज मैं बेकार समझता हूं। जब हम स्वतंत्रता सेनानियों, उनके कर्मों/कर्तव्यों को भुलाकर घर-द्वार, चौक-चौराहों, गली-मोहल्लों और छत-छज़्ज़ो पर तिरंगा लहरा कर देशभक्ति देखना चाहते हैं। 

            अब सवाल बत्तख़ मियां की, आख़िर क्यों उन्हें भूलकर हम अमृत महोत्सव को अधूरा कर रहे हैं। तो सुनिए...

           जिस महात्मा गांधी को हमनें राष्ट्रपिता माना है, जिसकी उपस्थिति ही हम चम्पारणियों और देश की आज़ादी के लिए भी महत्वपूर्ण था उनकी रक्षा अंग्रेजों के खानसामा रहे बत्तख़ मिया ने किया था। नहीं तो आज इतिहास में ना बापू होते और ना ही उनकी कहानी। बहार हुसैनाबादी (1864-1929) ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि एक रोज़ गांधी जी मोतिहारी कोठी के मैनेजर इरविन से मिलने गए। लेकिन किसानों के मसीहा बने गांधी जी को अंग्रेज किसी भी कीमत पर रास्ते से हटाना चाहते थे। बस क्या था इरविन ने रात्रिभोज में बतख मियां से दूध में जहर मिलाकर गांधी जी को देने को कहा, नहीं देने पर मारने की धमकी। बस क्या था बत्तख मियां ने सारी बाते राजेन्द्र प्रसाद को बता दिया, दूध गया लेकिन दूध जमीन पर गिर गया और बिल्ली पीकर मर गई और गांधी जी बच गए। बाद में अंग्रेजों में बत्तख मिया और उनके परिवार को बहुत पड़तारित किया। 1950 में जब



राजेन्द्र_प्रसाद राष्ट्रपति बने  और मोतिहारी आयें तब उन्होंने मियां जी को याद किया था। लालू जी ने अपने वक्त में स्टेशन पर मुख्यद्वार का नाम बत्तख़ मियां द्वार रखा, लेकिन आज यहां BJP के सांसद, विधायक हैं जो केंद्र और राज्य सरकार में मंत्री थे और कोई है।

समझ लीजिये की ये संविधान, राजनीति और इतिहास बदलने की जिम्मेदारी ले चुके हैं।


Thursday, July 7, 2022

सिर्फ सुर्खियों पर सक्रियता क्यों ?

एक सवाल बा रउआ सब से...

देश में जब कोई मुद्दा सुर्खियों में होता है, तब ना जाने क्यों लोगों की आंख खुल जाती है। जैसे आज हिंदू धर्म ख़तरे में दिख रहा हो या यूं कहें कि देवी-देवताओं का अपमान हो रहा हो।

              आज फ़िल्म मेकर लीना मनिमेकलई की डाक्यूमेंट्री फ़िल्म #काली के पोस्टर पर बवाल चल रहा है तो #हिन्दूवादी लोगों की भावना #भगवान के प्रति जाग गई है। लेकिन आज चिल्लाने वाले लोगों को ये जान लेना चाहिए कि #अभिव्यक्ति_की_आज़ादी के नाम पर कई बार #ईश्वरों का अपमान हुआ है लेकिन पहले भी जगी हुई ये क्रांति की ज्वाला स्वतः ही शांत हो जाती है।
              निर्देशक #अनुराग_बसु की फ़िल्म #लूडो (याद नहीं होगा), निर्देशक #राजकुमार_हिरानी की चर्चित फिल्म #पीके, #अक्षय_कुमार की फ़िल्म #लक्ष्मी_बॉम #राजश्री_देशपांडे की फ़िल्म #सेक्सी_दुर्गा (बाद में नाम बदला) #सैफअली_खान की चर्चित वेब सीरिज़ #तांडव, वेव सीरिज़ #ए_सूटेबल_बॉय जैसे कई फ़िल्म सीरिज़ में देवी-देवताओं और धर्म का अपमान हुआ। लेकिन Social Media क्रांति के बाद कुछ नहीं हुआ। जिसका नतिज़ा है कि आगे #अमिता_बच्चन की फ़िल्म #ब्रह्मास्त्र भी आने वाली है।
#आगे_सुने...
कुछ दिन पहले #चित्रकार #मकबूल_फ़िदा_हुसैन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हिन्दू देवी देवताओं की नग्न तस्वीरें बनाकर अपनी लोकप्रियता में चार चाँद लगाया था। हाल में MX_Player पर फेमस शो LUCK_UPP में विजेता बने #मुन्नवर_फारूखी अर्स से फर्श पर चला गया।
#ऑस्ट्रेलिया के #सिडनी में हुए एक फैशन शो में #लिसा_ब्लू नामक #फैशन_डिज़ाईनर द्वारा खुल कर हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान का मामला सामने आया। इस फैशन शो में डिजाइनर लीजा ब्लू ने जो कलेक्शन पेश किया उसमें हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों को अश्लील तरीके से इस्तेमाल किया गया। कई बार जूते चप्पलों पर हिन्दू देवी देवताओं की तस्वीरें देखने को मिली है। लेकिन कभी किसी का खून नहीं खौला और आज जब राजनीतिक पार्टियां रोटी सेक रही है तो हम भी फुरसत में हैं।

हँसी तो तब आती है जब हिन्दू बहुसंख्यक देश भारत में हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करने वाली #BJP सरकार में हैं लेकिन नपुंसक सरकार ने इस मामले में रूचि तो ज़रूर लिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समाज में इस कुकृत्य के लिए कोई विरोध दर्ज कराना भी उचित नहीं समझा। ना ही आगे ऐसे कुकृत्य को रोकने के लिए कोई कानून का ही ज़िक्र है। जो न्याय दिख रहा है वह चिल्लाते TV चैनलों पर और Social Media के लिए मोबाइल के Keybord की बटन पर दौड़ती उंगलियों पर ही दिख रही है।

Monday, June 20, 2022

एक चाल, अग्निवीरों को सम्मान

आज एक चैनल के #पाठशाला' में पढ़ रहा था। चैनल पूरी तरह से मोदी का ब्रांडिंग करने में लगा था और #अग्निवीर_योजना की फायदे बता रहा था। समाचार चैनल ये सिद्ध करना चाहता था कि मोदी जी #अग्निवीर_योजना लेकर आये हैं इसे सेना के लिए हर साल खर्च होनेवाला 1.02 लाख करोड़ बचेगा तो आगे सेना के लिए आधुनिक हथियार खरीदा जाएगा।

#समझे_कैसे_?
दरअसल सेना में रिटायर होने वाले जवानों की संख्या हर साल बढ़ती है। आंकड़ों के मुताबित 1990 में 1568 करोड़ पेंशन राशि थी जो साल 1999 में बढ़कर 6,932 करोड़ और 2021 में 1.02 लाख करोड़ है। अब जवान जब #अग्निवीर बनेंगे तो ये राशि उनके पेंशन से बचेगी भारतीय सेना युवाओं की फौज रहेगी (चलो यहां तक सही है) बचत होगी जिसका खर्च कहीं और किया जाएगा।
हमने सोचा ये चैनल जो मोदी की ब्रांडिंग के बहाने ही सही 1 बार #सांसदों और #विधायकों पर भी खबर चलाता तो समझ में आता कि फायदा और नुकसान क्या है।
#फैक्ट_समझिए
मंत्री, सांसदों और विधायकों को लेकर देखिये। देश में कुल #788संसद हैं और #4120_विधायक है होते हैं। इनमें देखें तो हर 5 साल पर कुल मिलाकर 4908 जनप्रतिनिधियों को पेंशन निर्धारित होता जबकि इनमें से कई ऐसे भी होते हैं जिन्हें विधायक होने के बाद सांसद/ मंत्री होने का भी पेंशन मिलता है। वो तो धन्य है कि इस बार पंजाब में मुख्यमंत्री #भगवंत_मान ने 1 विधायकी का 75 हज़ार तय कर दिया वार्ना देश सेवा के नाम पर आए जनप्रतिनिधि क्या करते हैं देश सेवा देखिये।
4908*50,000 (मान लेते हैं कम से कम) 24 करोड़,54 लाख प्रति महीना अनुमानि पैसा बचेगा तो क्या होगा देश कहाँ जाएगा ध्यान दें।
मुद्दा है इसे इग्नोर ना करें।
#अग्निपथ के #वीरों के लिए ये बड़ा सम्मान होगा।