आज से कुछेक दिन पहले जब बिहार में विधान सभा चुनाव अपने चरम सीमा पर था l लड़ाई मोदी की BJP और महागठबंधन के बीच थी बोलने वाले सब बोलते थे की BJP की सरकार सत्ता में आएगी पर मन के बेईमानों का तो बस मन सिर्फ़ ख़रीद बिक्री में जीवन यापन करने पर था तब तो रातो रात पैसे और मांश के कुछ टुकड़ो के अलावे शराब की दो घूंट पर मन बदल गया और अपना बहुमूल्य वोट को मतपेटी में डालने की वजाय कूड़े का डबा समझ कर उसमें डाल दिया क्योकिं उनका सोच था की सरकार किसी भी पार्टी की बने हमें क्या करना है !
पर जब से बिहार में महा गठबंधन की लालू-नीतीश सरकार सत्ता में काबिज हुई है फिर से जंगल राज का बोल बाला हो गया है !
सरकार के गठन के महज 2-3 के भीतर किड़नेपिग और हत्या ने मीडिया जगत में तो जंगल राज का बोल बाला हो ही गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से चोरी की बढ़ती घटना ने लोगों को जंगलराज पार्ट -2 के साये में जीने को मजबूर कर दिया है !
आज हर दिन समाचार पत्रों की शुर्खियों में चोरी की घटना ने अपना स्थान बना लिया है...
शहर में व्यापारी खुद को शुरक्षित महसूस नहीं कर रहें है तो, गांवों में लोग अपना घर छोड़ कर कहीं रात नहीं बिता पाते है लोगों में बस एक बात का भय बना हुआ है की कहीं कल चोरी के लिए उनके घर या दुकान की बारी ना हो और प्रशासन है जो हाथ पे हाथ धरे बैठी है, प्रशासन का बस कहना यही होता है की हम तो रात में पेट्रोलिंग करते ही है अब गलियो में कैसे पेट्रोलिंग करें अगर आपको चोरी से बचना है तो घर में जगरम करें । अब सवाल उठता है की अगर चोरी से बचने के लिए लोग अपने घरों में रात में जगरम करें तो फिर सुरक्षा का दावा करने वाले पुलिस के दावे का क्या और दूसरी बात की अगर सब लोग रात में जगरम करें तो फिर दिन में वह सोये या फिर रोजी-रोजगार के चक्कर में पड़े ।
सरकार है वह दिखावे के लिए पुलिस-प्रशासन को चुस्त करने की बात करती है जब जंगलराज का बात होता है तो भड़क जाती है, कार्रवाई के नाम पर पुलिस मजबूर या पीड़ित को ही अपना शिकार बना लेती है और सरकार इसी कार्रवाई पर पीठ थपथपाने से बाज नहीं आती है।
अब सवाल उठता है की लोगों के बीच चोरों का दहसत, जान-माल की चिंता जंगलराज नहीं है तो और क्या है ?
क्या इस समस्या के जिम्मेदार आप और हम नहीं है, क्या पैसे और 2 घूंट शराब के लिए अपना किमती वोट बेचने वाले जिम्मेदार नहीं है । सोचने वाली बात है की अब भी सरकार के जो हिमायती है वो इसे अच्छी सरकार कह रहें है उनके सामने तो उनमें कोई दोश ही नहीं है और उनके सामने किसी दुआरे सरकार की बात करो तो ओ खुद सोशल नेटवर्किंग साईट पर भी चपलुश कहते नहीं थकते है जो खुद चपलुश है, मैं बस उनसे एक ही बात पूछना चाहता हूँ की ये 'जंगलराज पार्ट- 2' नहीं तो क्या है ?
Friday, February 19, 2016
जंगलराज पार्ट -2 नहीं तो क्या ?
Subscribe to:
Posts (Atom)