Friday, August 13, 2021

गजब की अजय देवगन की फ़िल्म BHUJ The Power of India




भुजः द प्राइड ऑफ इंडिया लंबे इंतजार के बाद बड़े पर्दे की जगह छोटे पर्दे पर आई, जिसने धमाल मचाना शुरू कर दिया है। अभिषेक दुधैया (मुकेश दुधैया के नाम से भी जाना जाता है) निर्देशित फिल्म दर्शकों को शुरुआत से ही बांधने में सफल होती है। अपने निर्देशन के सफ़र में पहली बड़े पर्दे की फ़िल्म कर रहे अभिषेक ने कोई कमियां नहीं कि है।

कहनी: वैसे तो कहानी सब जानते है कि फ़िल्म वायु सेना की जबाज़ी और भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर विजय कार्णिक (#अजय_देवगन) के बहादुरी और दूरदर्शी फैसलों पर रियल घटना से आधारित है। फिल्म साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। जिसमें तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के मोर्चे पर लगातार पस्त पड़ते पाकिस्तान के हुक्मरानों, सेना अधिकारियों ने सोचा कि भारत पर पश्चिम दिशा से हमला किया जाए। जिसके लिए मोर्चों पर लड़ना भारत के लिए संभव नहीं होगा। इसलिए पश्चिम में जीत हासिल करके पूर्वी मोर्चे की सौदेबाजी की जाएगी क्योंकि यह बात उन्हें समझ आ चुकी थी कि, पूर्वी पाकिस्तान उनके हाथ से निकल गया है। उसकी जगह बांग्लादेश बनेगा। अतः आखिरी उम्मीद पालते हुए पाकिस्तानी तानाशाह और सेनाध्यक्ष ह्याया खान का संवाद था कि पश्चिम में अप्रत्याशित हमले से राजस्थान और गुजरात के इलाकों को जीत कर वह भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ दिल्ली में चाय पीएंगे। और भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री से कुछ मोलभाव करेंगे। लेकिन हार के साथ ही फ़िल्म के आखरी दृश्य में ह्याया के टूटते सपनों की दर्शाया गया है।

 फ़िल्म की शुरुआत

फ़िल्म की शुरुआत भुज एअर बेस पर पाकिस्तानी  लड़ाकू विमानों द्वारा बरसाए जा रहे बम के गोलों से होती है। जिसका जवाब देने विक्रम सिंह बाज (एमी विर्क) अकेले प्लेन लेकर निकल जाते हैं।  जहां ख़ूब आसमानी करतब होता है, इधर पाक सेना के जवान लगातार गोले-बारूद गिरा रहे होते है जवाब में भारतीय सेना के जवान भी कई विमान को मार गिराते हैं। हालांकि इस लड़ाई में भुज बेस पूरी तरह से बर्बाद हो जाता है। जिससे जल्दी से जल्दी बनाने की ज़िम्मेदारी विजय कार्णिक पर होती है जिसके लिए उन्होंने पड़ोस के गांव की मर्दानी सुंदरबेन जेठा (सोनाक्षी सिन्हा) से मदद मांगते हैं जिसके लिए गांव की 3सौ महिलाओं के सहयोग से एयर बेस तैयार हो जाता है। उधर पाकिस्तानी सेना ने 1000 जवानों और टैंक के साथ पश्चिमी इलाके से भारत पर हमला बोल दिया। जिनसे लोहा लेने की जिम्मेदारी सरद केलकर के कंधे पर होती है, जो बेहतर प्लान के साथ लड़ाई करते हुए शहीद हो जाते है, वहीं उनका साथ स्थानीय ग्रामीण रणछोड़दास पागी (संजय दत्त) देते दोनों ने मिलकर सैकड़ों सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। वही फ़िल्म में छोटे अभिनय के साथ ही वर्तमान में लोगों की दिलों पर राज करने वाली नोरा फतेही कराने पाकिस्तान में रहते हुए भारतीय सेना को गुप्त जानकारी देने के कारण मौत की नींद सुला दी गई।

स्क्रीन प्ले/संवाद

फिल्म में बहतर स्क्रीन प्ले कविता रूप में बनाये गए संवाद जिसे- "महिलाओं के पास ताकत इतनी होती है कि बटन से लेकर...." बेहतर लिखा गया है। जिसके कारण दर्शकों को फिल्म ने शुरुआत से आखिरी वक्त तक बांधे रखा है। फिल्म में दर्शकों के पसंद को देखते हुए ताकि दर्शक खुद को बोर ना महसूस करें। लड़ाई और कहानी को एक साथ फिल्माना बेहतर साबित हुआ है। बेहतर सेट पर शूटिंग की गई इस फिल्म में #कवित्री=अनामिका की कविताओं को स्क्रिप्ट में शामिल करना बेहतर अनुभव देता है। इतिहास के पन्नों में दर्ज कहानी को वैसे तो बहुत लोग जानते हैं लेकिन जिस तरीके से स्क्रीन प्ले तय किया गया है, जिसके कारण फ़िल्म नहीं लगा है।

निर्देशन

छोटे पर्दे पर कई टीवी सीरियल को तैयार करने वाले अभिषेक  की यह पहली फिल्म है जिसमें उन्होंने दर्शकों की पसंद को देखते हुए किसी भी तरीके की कमी नहीं की है। वैसे तो फ़िल्म में बेहतर कलाकार हैं जिनकी अपनी फ्रेंड फॉलिंग है इन सब के बावजूद भी फिल्म में निर्देशक ने कोई चूक करने की कोशिश नहीं की है। फिल्म में बेस्ट VFX और शानदार कैमरा निर्देशन के कारण फिल्म में जान आ गई है। फिल्म को मरुस्थल, लेह में शूट किया है।निखिल मैं जाने क्या बावजूद भी बेहतर सेठ भारतीय सेना की टुकड़ी वायु सेना की लड़ाई को दिखाना काफी आनंददायक रहा है निर्देशन में एक शानदार बात और रही कि फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं अजय देवगन के साथ ही फिल्म बाकी अन्य कलाकारों जैसे संजय दत्त, एमी विर्क, सोनाक्षी सिन्हा शरद केलकर को भी पूरी तरीके से अहमियत देती है

कलाकार/अभिनय

फिल्में भुज एयरवेज स्क्वाडर्न लीडर बने विजय कार्मिक के रूप में अजय काफी खूबसूरती के साथ अपने अनुभव से समझौता नहीं किया है। अपनी आंखों से अभिनय करने वाले अजय देवगन ने फिल्म में कोई कमी नहीं की है। अस्थान महिला का किरदार निभाने वाली सोनाक्षी सिन्हा ने अपने अभिनय के साथ थोड़ी कमजोर दिखी हैं। फिल्म में संजय दत्त एमी विर्क शरद केलकर और नोरा फतेही सभी को निर्देशन में बेहतर मौका दिया है कुल मिलाकर देखें तो इस फिल्म को बेहतर तरीके से सजाया गया है जो दर्शकों को खूब भा रहा है इस फिल्म में बेहतर अभिनय, शानदार स्क्रीन प्ले, और कैमरा वर्क, और VFX के कारण कमाल कर गया है।

फ़िल्म को मेरी तरफ से मिले 4.5/ 5 STAR