Thursday, September 22, 2022

नीतीश-चिराग के लिए तेजस्वी बनेंगे कांटा रोकना मुश्किल, आख़िर क्यों ?

 

बिहार में हाल के दिनों में बदले सियासी समीकरण ने कई लोगों को सोंचने पर मजबूर कर दिया तो कई बड़े बदलाव देखने को मिले। लेकिन जो बदलाव राजद सुप्रीमो लालू यादव के छोटे बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव में देखने को मिली है उसकी शायद किसी ने कल्पना नहीं थी। गांवों में कहते हैं न "बेकरों-बेरोजगारों को ठीक करना है तो उसके कंधें पर जिम्मेदारी का बोझ डाल दो (शादी करा दो) वह खुद-बखुद ठीक हो जाएगा। शायद यहीं जिम्मेदारी ने तेजस्वी को पिछले कुछ दिनों में बदल दिया है। कैसे ? इसे समझते हैं।

बिहार में NDA सरकार में लंबे वक्त तक नेता प्रतिपक्ष रहने वाले तेजस्वी यादव वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं साथ ही कुछ महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं इतना ही नहीं लालू यादव के बाद राजद को मजबूती देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रहे हैं। इसी के मद्देनजर तेजस्वी यादव ने बुधवार को पार्टी के लिए राज्य परिषद की बैठक की जिसमें तेजस्वी ने घोषणा करते हुए बताया कि राजद में जिलाध्यक्ष ही सबसे मजबूत पद होगा।

जिला में होने वाले किसी भी कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष ही उसका नेतृत्व करेगा।
अगर उस कार्यक्रम में कोई विधायक या मंत्री पहुंचता है तो वह जिलाध्यक्ष के पीछे खड़ा होगा ना की उसके आगे। तेजस्वी के इस फैसले का भले भी पार्टी के नेता और रौब झाड़ने वाले पार्टी के विधायक सही नहीं मान रहे हों लेकिन इस फैसले का परिणाम आगे बहुत बेहतर होने वाला है। ये साफ है कि तेजस्वी यादव ने अपने पार्टी के दम को बखूबी समझ लिया है इसलिए पार्टी जमीनी स्तर से मजबूत करना चाहते हैं ताकी जिला स्तर के अधिकारियों के सहारे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को एक्टिव कर सकें, क्योंकि कोई भी पार्टी बिना कार्यकर्ताओं के मजबूती से आगे नहीं बढ़ सकती है।

बिहार में नई सरकार के घठन के बाद से लगभग बिहार की पूरी जिम्मेदारी


तेजस्वी यादव के कंधे पर ही हैं क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2024 के चुनाव के लिए विपक्ष को एकजुट कर रहे हैं। तो बड़े फैसले तेजस्वी ही कर रहे हैं, चाहे वह अपने स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर अस्पतलों का दौरा करना हो या इलाके बाद फ्री में मिलने वाले दवाओं की पूर्ण आपूर्ति के आदेश।

बिहार में लालू-राबड़ी (माता-पिता)सरकार के दौरे को जंगलराज और चारा घोटाले के आरोपी का पुत्र होने का दंश झेल रहे तेजस्वी यादव ने अपने लगाम से बाहर रहने वाले मंत्रियों और विधायकों को वश में करने के लिए कई बड़े आदेश जारी किये हैं। जैसे अधिकारियों से समन्वय बनाकर काम करना, बेतूके बयानबाजी नहीं करना के साथ ही विवादों से दूर रहना। ये अलग बाद है कि कृषि मंत्री सुधाकर सिंह आपे से बाहर दिखे और चर्चे में रहे।

तेजस्वी यादव ने अपने मंत्रियों को अपने विभागों की विशेष देखभाल के साथ ही सभी कार्यों को सोशल मीडिया में पब्लिकली करने के आदेश दिए हैं ताकी जनता के बीच सरकार के कार्यों के साथ राजद के कार्यों को जनता तक पहुंचाया जा सके। इतना ही सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबित तेजस्वी ने सोशल मीडिया (IPRD) को भी सख्त किया है और रेलैया पत्रकारों पर नज़र रखने के आदेश दिया है। ताकि कोई सरकार के ख़िलाफ़ झूठी ख़बरें या अफवाह ना उड़ाये।

अब तेजस्वी को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं। यहीं तेजस्वी यादव है जो बिहार विधानसभा चुनाव में एक दिन में 12 से 15 चुनावी रैलियां करते थे। जिसका परिणाम ही रहा तेजस्वी और राजद मजबूती के साथ आगे बढ़े और बिहार में मजबूत विपक्ष बनकर बैठे। और तो और तेजस्वी यादव ने बिहार में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी बखुबी निभाई है ये अलग बात है कि कोरोना काल में ट्विटर बाबू बनने का भी सौभाग्य उन्होंने लिया है। तो बिहार में बाढ़ की विभिषिका के बीच फरारी भी तेजस्वी यादव ने ही दर्ज है।


लेकिन शादी के बाद से कहें या बिहार में सत्ता की कुर्सी की जिम्मेदारी मिलते ही तेजस्वी यादव में बदला से इंकार नहीं किया जा सकता है। तेजस्वी की अगर यहीं स्थिति यहीं रही और आने वालों दिनों में तेजस्वी ने खुद को और संभाला तो ये तय है कि बिहार में लालू यादव के बाद तेजस्वी ही बिहार में जनता के दिलों पर राज कर सकते हैं। क्योंकि बिहार में कई युवा चेहरे हैं लेकिन चिराग और तेजस्वी यादव को सौगात में मिली सियासत में तेजस्वी यादव ज्यादा असरदार दिख रहे हैं। और तेजस्वी का यहीं असर JDU, नीतीश और चिराग पासवान को ले डूबेगी। 

 

Friday, September 2, 2022

झारखंड में BJP के लिए अंकिता बस बहाना है ?

झारखंड के दुमका में अंकिता मर्डर केस के बाद पूरे देश में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। तो दूसरी तरफ़ हर एक व्यक्ति अंकित के लिये न्याय की मांग कर रहा है और आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की बात कर रहा है ताकि दुबारा कोई लड़की अंकिता की तरह तड़प कर ना मारे। वहीं इन सब से इत्तर बीजेपी इस मामले के सहारे ही सही प्रदेश में अस्थिरता की संकट झेल रही सोरेन सरकार को धराशाई कर मानो कुर्सी पर कब्ज़ा करने की हर जुगत में जुटी है।

तभी तो घटना के बाद सरकार और उसके आलाधिकारी मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई में   जुटे हैं। लेकिन बीजेपी नेता इसे सरकार की विफलता बता राजनीतिक रोटी सेकने में।https://twitter.com/ChawlaJainender/status/1564808123105570816?t=HUvsuGtVnguktH1mdR_JfQ&s=19

अंकिता के परिजनों को हर संभव साथ देने का भरोसा देने वाले BJP के नेता जो आज सरकार पर आरोप लगा रहे हैं क्या ये भूल गए की संविधान में सरकार के साथ विपक्ष की भी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। माना कि सरकार की आंखे अंकिता को ना देख पाई हो, मृत सैया पर पड़ी अंकिता की आवाज़ ना सु पाई हो। लेकिन आवाज़ आप तक गई तो आपने क्यों नहीं सहायता पहुँचाई ? क्या आप भी राजनीति के लिए अंकिता के मौत का इंतज़ार कर रहे थे, या चुनावों में खरबों खर्च कर आसमान में गुलेटिया मरने वाले आपके हेलीकॉप्टर की तेल खत्म हो गई थी ? नहीं साहब! आपको तो जाननीति करनी थी और ये हम नहीं कह रहे बाकी BJP के इस डेलिगेशन में शामिल और सरकार पर आज गंभीर आरोप लगा रहे BJP नेता कपिल मिश्रा की झारखंड की आखिरी दो यात्राएं चिल्ला-चिल्ला कर कह रही है।

भरोसा नहीं तो पहले इन तस्वीरों को देखिए और ध्यान से संवाद को सुनिये....

 https://fb.watch/fhqdJ_jZjL

कुछ याद आया ? नहीं ! कोई बात नहीं हम आपको समझाते हैं। यह तस्वीर भी कपिल मिश्रा के झारखंड दौरे की ही है। हजारीबाग के बरही में इसी साल सरस्वती मूर्ति विसर्जन के दौरान 2 समुदायों में हुई झड़प के बाद रूपेश पांडे की मॉब लॉन्चिंग में हत्या हो गई थी। उसी दरम्यान रूपेश के परिजनों से मिलने पहुंचे कपिल मिश्रा को रांची एयरपोर्ट पर झारखंड पुलिस दें हिरासत में ले लिया था और लगभग 5 घंटे के बाद वापस दिल्ली भेज दिया था। उस वक्त कपिल मिश्रा ने झारखंड मैं आने के बाद रूपेश पांडेय की मां से मिलने का भरोसा दिया था लेकिन साहब आज भूल गए रूपेश की माँ से मिलना। क्योंकि मुद्दा जो नया मिल गया था।

मतलब साफ है झारखंड में BJP को हिंदुत्व की अंधी में बहाना है और सत्ता की कुर्सी पर धाक जमाना है। हालांकि इन आरोपों के बाद BJP के कई नेता मुझसे नाराज़ होंगे। लेकिन उनके सवालों का जवाब BJP नेता कपिल मिश्रा के ट्विटर पर मौजूद है।

सिस्टम को हिंदुत्व ECO सिस्टम बनने में जुटे कपिल ही आख़िर क्यों दिल्ली से दौरा कर  झारखंड पहुँचे। क्या झारखंड, बिहार या उत्तर प्रदेश में BJP में कोई कद्दावर नेता नहीं है। लेकिन सवाल नेताओ का नहीं मुद्दों का है। जब अंकिता की हत्या और हजारीबाग के रूपेश की हत्या का आरोप किसी ख़ास समुदाय  पर लगा है, जिसे भुनाने में मानो कपिल मिश्रा BJP के लिए ब्रह्मास्त्र बन गए हैं तभी तो उन्हें भेजा जाता है। वरना BJP सच में संवेदनाओं को समझती तो अंकिता के परिजनों से मिलने का साथ ही... हजारीबाग के उस मां की पथराई आंखों की आंसू भी पोछने BJP नेता जरूर जाते जो अपने बेटे के गम में पिछले 6 महीने से सुधबुध खो चुकी है और BJP नेता कपिल मिश्रा के आने का इंतज़ार कर रही है।

सच में BJP के पास संवेदना होती तो रांची में BJP नेत्री के करतूतों को झेल रही उस नौकरानी की हाल भी जानने की कोशिश करते जो आज अस्पताल में ज़िन्दगी और मौत से जूझ रही है।

लेकिन BJP के लिए अंकिता तो बहाना है, यहां जाति-धर्म के नाम पर वोट बनाना है। खुद सरकार में जहां हैं चुप रहते हैं, लेकिन विपक्ष में होतो तो सरकार की विफ़लता हर मुद्दे पर सिद्ध कर ख़ुद कुर्सी तक पहुँचने का रास्ता बनाना है।

✍️ किशोर