Wednesday, July 20, 2022

कहाँ गएं बत्तख़ मियां ?

बचपन में हमने सिद्धार्थ की कहानी पढ़ी थी जिसमें लिखा था "मारने वाला से ज्यादा बचाने वाले का अधिकार होता है" लेकिन आज इतिहास को बदलने, ग़लत इतिहास बताने/पढ़ाने का दावा करने वाली सरकार और रोज-रोज TV डिबेट में चिल्लाने वाले BJP के नुमायनदे भी भूल गए हैं कि वह क्या कर रहे हैं ?

दरअसल लंबे वक्त बाद आज यात्रा के दौरान जिला मुख्यालय (मोतिहारी, अब बापूधाम मोतिहारी) आने का मौका मिला। स्टेशन के पीछे (PF-1) चाय पीने गया तो स्टेशन का जीर्णोद्धार किया हुआ पाया। कई चीजें बदल गई थी कई नई स्थापित हो गई थी। इस बदलाव में मैंने बत्तख़ अंसारी की आख़िरी निशानी नहीं देखा। चायवाले से पूछा तो उन्होंने व्यंगात्मक अंदाज़ में बोला 'बत्तख़ मियां मर गए' मैंने पूछ 'ओ ज़िंदा कब थे ?' 'मरने के बाद कुछ दिन तक जिंदा थे, फिर मर गए' चायवाले ने जवाब दिया। 

             चायवाले का जवाब सुनकर मुझे याद आया आज़ादी का अमृत महोत्सव और उसके तहत देश के युवाओं के रग- रग में देशभक्ति की आग डालने वाले हर घर तिरंगा अभियान की जिसकी तैयारी सरकार तेज़ी से कर रही है। तो इस तैयारी में सत्तापक्ष के साथ ही विपक्ष भी खड़ा है क्योंकि विरोध किया तो देशद्रोही का तंगमा सत्तासीन संस्कारी पार्टी BJP लटका देगी। लेकिन उन सारे कार्यक्रमों को आज मैं बेकार समझता हूं। जब हम स्वतंत्रता सेनानियों, उनके कर्मों/कर्तव्यों को भुलाकर घर-द्वार, चौक-चौराहों, गली-मोहल्लों और छत-छज़्ज़ो पर तिरंगा लहरा कर देशभक्ति देखना चाहते हैं। 

            अब सवाल बत्तख़ मियां की, आख़िर क्यों उन्हें भूलकर हम अमृत महोत्सव को अधूरा कर रहे हैं। तो सुनिए...

           जिस महात्मा गांधी को हमनें राष्ट्रपिता माना है, जिसकी उपस्थिति ही हम चम्पारणियों और देश की आज़ादी के लिए भी महत्वपूर्ण था उनकी रक्षा अंग्रेजों के खानसामा रहे बत्तख़ मिया ने किया था। नहीं तो आज इतिहास में ना बापू होते और ना ही उनकी कहानी। बहार हुसैनाबादी (1864-1929) ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि एक रोज़ गांधी जी मोतिहारी कोठी के मैनेजर इरविन से मिलने गए। लेकिन किसानों के मसीहा बने गांधी जी को अंग्रेज किसी भी कीमत पर रास्ते से हटाना चाहते थे। बस क्या था इरविन ने रात्रिभोज में बतख मियां से दूध में जहर मिलाकर गांधी जी को देने को कहा, नहीं देने पर मारने की धमकी। बस क्या था बत्तख मियां ने सारी बाते राजेन्द्र प्रसाद को बता दिया, दूध गया लेकिन दूध जमीन पर गिर गया और बिल्ली पीकर मर गई और गांधी जी बच गए। बाद में अंग्रेजों में बत्तख मिया और उनके परिवार को बहुत पड़तारित किया। 1950 में जब



राजेन्द्र_प्रसाद राष्ट्रपति बने  और मोतिहारी आयें तब उन्होंने मियां जी को याद किया था। लालू जी ने अपने वक्त में स्टेशन पर मुख्यद्वार का नाम बत्तख़ मियां द्वार रखा, लेकिन आज यहां BJP के सांसद, विधायक हैं जो केंद्र और राज्य सरकार में मंत्री थे और कोई है।

समझ लीजिये की ये संविधान, राजनीति और इतिहास बदलने की जिम्मेदारी ले चुके हैं।


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