Friday, July 28, 2023

"जन्मदिन" पहले और अब

वो बचपन कितना प्यारा था... अपनों से भरा घर हमारा था जन्मदिन आते ही... मानो उत्सव की तैयारी करते थे उस वक्त केक का नहीं सहारा था हलवा से भरी थाली सजाते थे केक कट रहा है... ये घूम- घूम के सबको बताते थे मां होती थी, दादा जी, दादी का भी सहारा था चाचा की पॉकेट से निकलती टॉफी चाची की पेंसिल-कटर प्यारा था फिर अगले दिन... बहनों की गिफ्ट पर दावेदारी फिर जमकर होती मारामारी लेकिन आज... आज मैं तो बड़ा होगा गया अपने पैरो पर खड़ा हो गया अब ना जन्मदिन की आस रहती है ना बचपन वाली वो प्यास रहती है कुछ बधाइयाँ मिल ही जाती है कुछ व्यस्तता तैयारियों को खा जाती है अब तो अपनो के पास भी वक्त न रहा एक कॉल कर ले ये नियम सख्त ना रहा अब तो हम सोशल मीडिया में सिमट रहे हैं... भावनाएं तो सिर्फ स्टेट्स में लिपट रहे हैं वक्त भी कुछ ऐसा ही आया है ऐसे ही चलना है ये बताया है सब ने माना है... बढ़ रहे हैं दायरे, इंसान सिमट रहा है सोशल मीडिया पर बस प्यार पनप रहा है जिसको जानते नहीं वो अपना बना है जो अपने है वो 100 कोस पर खड़ा है अब तो ना BDAY, ना Aniversy, ना उत्सव अच्छा लगता है बस स्टेट्स लगाना है,क्योंकि दुनिया में यहीं सच्चा लगता।

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