Friday, December 29, 2023

मेरा गांव बदल रहा है, देखो आगे बढ़ रहा है ?

काफी लंबे वक्त के बाद एक बड़े समय अवधि को गांव में बिताने का मौका मिला, तो इच्छा जगी की गांव को देखूं और देखा भी। लेकिन गांव वह नहीं दिखा जो देखने की चाहत थी। पहले वाला गांव मानों आज वाले गांव के सामने किताबों के पन्नों में सिमट गया था या अतित की याद बन गया था। हमने 90 के दशक के गांव को जिया था और किताबों में कथा सम्राट मुंशी जी (मुशी प्रेमचंद) की कहानी पढ़कर बड़ा हुआ हूं, जिनकी कहानी में हलकू, केदार या सुजान का नाम सुनते हीं गांवों की व्याख्या हो जाती थी उस वक्त गांवों की हकीकत ऐसी थी की ग्रामीण जीवन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता था। लेकिन आज गांव शहर से ज्यादा तेजी से बदल रहा है कारण है लोगों में आधुनिक बनने की धुन सवार होना जिसका नतीजा है कि अब गांव, गांव नहीं बल्कि बाजारों और शहर की बराबरी करने लगे हैं और शहर मानों वीरान।
आज शुक्रवार है... मुझे याद है हमारे गांव से बाजार/कसबे की दूरी महज एक कोस यानी 3 किलो मीटर है और पहले बाजार में सप्ताह में दो निर्धारित दिनों पर बाजार गठीत होता था जहां गांव के किसान अपने सब्जियों और फलों की बिक्री करने पहुंचते थे और गांव से लोग खरीदारी भी करने आते थे। इतना ही नहीं गांव के लोग कई और कामों के लिए भी बाजार लगने के दिन का इंतजार करते थे। लेकिन आज बाजार मानों गांवों तक पहुंच गया है। आज मेरे गांव के बाहर एक छोटा बाजार लगने लगा हैं जिसे गांव के लोगों ने एक नाम दे दिया है और ये सिर्फ मेरे गांव के ही साथ नहीं बल्कि 28 राज्यों और 9 केंद्र शासित प्रदेशो वाले देश के 6,28,221 गांवों के साथ है। ऐसा नहीं है कि शहरीकरण का ये दौर अचानक बढ़ा है। 1991 में 25.71 फीसदी लोग शहरों में थे। उससे 10 साल पहले यानी 1981 में ये आंकड़ा 23.34 फीसदी था। हलांकि 2001 के जनगणना आंकड़े के अनुसार 27.81 फीसदी और 2011 के आंकड़ों के अनुसार 31.16 प्रतिशत लोग शहरों में बसने लगे हैं। हालांकि साल 2020-21 में आई महामारी कोरोना के बाद एक बड़ा बदलाव देखा गया। इस दौरान लोग शहर से गांव की तरफ तो भागे लेकिन गांव देखते ही देखते शहर बनने लगा और आज शहर मानों गांव।
अब सवाल ये है कि गांव कैसे शहर बनने लगा ? इस सवाल के जबाव के लिए पहले हमे समझना होगा की शहर का मतलब क्या है? 'शहर' असल में ऊर्दू शब्द है जिसका अर्थ होता है नगर या सिटी। "शहर" का मतलब तो आप बेहतर जानते ही होंगे, यानी नगर - जहां ग्रामीण क्षेत्रों के विपरीत आधुनिकता और औद्योगिक परवेश का बोलबाला है । सड़क, बिजली, पानी, बड़े बाजार, माल, यातायात के आधुनिक साधन इत्यादि से लबरेज़ जगह जिसे हम आमतौर पर शहर कहते हैं। अब वह सारे साधन-संसाधन गांवों में आसानी से मौजूद है। गांव में अब गली-गली तक सड़कें बन गई हैं और बड़ी गाड़ियों के साथ ही टोटो-ऑटो रिक्सा की मौजूदगी ने यातायात को आसान बना दिया है, अब गांव को अंधेरे से बचाने के लिए टिमटिमाता दीया-बाती या लालटेन की रौशनी नहीं बल्कि 24 घंटे बिजली की सुविधा है, ओ छोड़िए न लोगों के घरों में खोजने पर चुल्लू भर मिट्टी का तेल (किरासन तेल) भी नहीं मिलेगा क्योंकि पहले गांव में तेल डिलर (सरकारी विक्रेता) के यहां मिलता था लेकिन अब वह सुविधा भी सरकार ने बंद कर दिया है। गांव भी अब अधुनिक सुविधाओं से लैस हो गए हैं जिसका नतीजा है कि अब ऑनलाइन खऱीदारी में गांव में बढ़ गया है। और तो और शहरों में रेडी लगाने वाले अब गांव की तरफ कूच कर गए हैं जिसके कारण गांव में महिलाएं भी खूब खरीदारी कर रही है और लोगों के लिए रोजगार का साधन भी बढ़ गया है और गांव शहर बन गया है।
हालांकि गावों के बदलाव को देखकर मन चकित तो नहीं है लेकिन इतनी तेजी से हुए बदलाव को हमारे गावई सामाजिक परिवेश ने ऐसे स्वीकार कर लिया है कि क्या ही बताएं। अब गांव में शांति नहीं हैं, जहां गांव में पहले पड़ोसियों के झगड़े सुनाई देते थे और गांव की बहुएं घर की रोसनदान (घरों की दीवारों में कुछ जगह हवा के लिए छोड़ा जाता है) खिड़की या छत की बालकनी से झगड़े को सुना करती और घंटों चर्चा करती थी आज वह सब खत्म है। आज गांवों में भी DJ की रापचीक वाली धुन सुनाई देती और पड़ोसी शहरों वाले पड़ोसी की तरह अनजान हो गए हैं। जो कुछ जानकार बचे भी हैं उन्हें मोबाइल एडिक्शन ने अपने जाल में फांस लिया है। उसकी सबसे ज्यादा शिकार आज की नई पीढ़ी है। वह पीढ़ी जिस पर अधुनिकता के दौर ने इस तरह असर किया है कि वह वाट्सएप यूनिवर्सिटी की ज्ञान से खुद को विद्वान और अपने से बड़ों को अज्ञानता की मूरत समझते हैं जिनके पास ना ही संस्कारों की सांस बची है ना ही भविष्य में होने की आस... अब ऐसे गांव में रहने के लिए लोगों के पास क्या बचा है यह रहने वाले और देखने वाले ही तय करते हैं या कर रहे हैं... अब तो गांव में रहने वाले शहर जाने की ना उम्मीद कर रहे है ना वहां होने पाली परेशानियों को कोश रहे हैं। फिर बचा क्या है दोनों में अंतर ये आप ही बताएं...

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