Saturday, October 2, 2021

उम्मीदों का विश्वास

तुमसे दूरी का एहसास हर पल मुझे सताती है,
तेरे साथ गुज़ारा हर पल मुझे तड़पाती है
जब भी तुझे भूलने की कोशिश की ऐ दोस्त,
तूँ दिल के और भी करीब आ जाती है।

तेरे साथ ज़िंदगी बिताने का सपना सजाया था,
कभी रिक्शे, कभी ऑटो पर घूम-घूम कर प्लान भी बनाया था।
सपनो के भंवर में डूबने का अहसास भी पाया था,
लेकिन ग़लती से गलती कर के मिट्टी में भी मैंने ही मिलाया था।

अब तो ना आस दिखता है...
ना इस फंसे भवर में कयास दिखता है
लेकिन दोस्ती को सच मायने में निभाउंगा,
अब सिर्फ़ दिल में यहीं एक विश्वाश दिखता है।


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