Showing posts with label केशव प्रसाद मौर्य. Show all posts
Showing posts with label केशव प्रसाद मौर्य. Show all posts

Tuesday, March 28, 2023

अतीक तो बस बहाना था !

 देश की राजनीति, हालात और परिस्थिति आज भी चौका रही है और पहले भी कई बार लोगों को हैरान कर चुकी है। देश की राजनीति में जो हो रहा है यानी राहुल गांधी की सदन से सदस्यता जाना ये कोई नया नहीं है। अब तक लगभग 200 सांसद और विधायक कई आरोपों में सदन की सदस्यता गवां चुके हैं। लेकिन 4 साल पुराने मामले में कोर्ट में BJP नेता का दुबारा अर्जी लगाना और अचानक सूरत कोर्ट का नाटकीय अंदाज में फैसला आना किसी को पच नहीं पाया। नतीजन सोशल मीडिया में लोगों की प्रतिक्रिया और कांग्रेस की नाराजगी, राजघाट पर अनशन (जिसे पुलिस ने सुरक्षा का झांसा देकर अनुमति नहीं दी) और फिर अगले दिन कांग्रेस के आंदोलन की चेतावनी। बस क्या था एक नए खलनायक (अतीक) की Entry। पालकी सजी, रातो-रात यूपी पुलिस के जवान (45 की संख्या में) बाराती बने और फिर बारात निकली जो मीडिया को हाइजेक कर कांग्रेस के आंदोलन को मीडिया और लोगों से दूर कर दिया।

पहले से रची जा रही थी स्क्रिप्ट ?

राहुल गांधी ने 'भारत जोड़ो' यात्रा शुरू की तो BJP को लगा शायद ये यात्रा भी आलू से सोना निकलने जैसा सिद्ध होगा। लेकिन पहले फेस की यात्रा ने BJP की बेचैनी बढ़ा दी। यात्रा जब तक दक्षिण भारत में थी तब तक चैन की बंसी बजाने वाले BJP नेता, यात्रा के दिल्ली-यूपी पहुंचते ही फ्लॉप साबित करने में जुट गए। बावजूद यात्रा पूरी भी हुई और फिर शुरू भी...

देश में कई नेताओं ने यात्रा से इतिहास बदला है  कहानी कुछ ऐसी ही चल रही थी राहुल की।


फ़िर क्या था "ना रहिए बांस, ना बजी बांसुरी" वाली स्क्रिप्ट पर काम शुरू हुआ। वैसे सूरत कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा लेकिन BJP नेता का केस करना, वापस लेना और पुराने मामले में समय पर फैसला आना सब इत्तेफाक लगा।


और तो और कोर्ट के फैसले के महज चंद घंटों में सदस्यता जाना घर खाली करने की चेतावनी। सब कुछ अचानक होना भी परेशान कर रहा था। कांग्रेस की आंदोलन रूपी प्रतिक्रिया तो लाजमी थी।

लेकिन असल खेल तो तब शुरू हुआ जब प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड में आरोपियों से कोसो दूर यूपी पुलिस अचानक एक्शन में दिखी। अब तक तो माफिया अतीक अहमद को साबरमती जेल (गुजरात) से लाने की चर्चा थी। लेकिन पुलिस की सोच से पहले कोर्ट ने ही अतीक को पुकार कर लिया। समझ ही नहीं आया कब कोर्ट से ऑर्डर हुआ (उमेश पाल अपहरण मामले में पेशी के लिए) ?, कब यूपी पुलिस की टीम बनी ? किसने ये तय किया की हवाई नहीं सड़क मार्ग से लायेंगे ?  ये सब तब दिखा जब साबरमती जेल के गेट पर पालकी सजी (यूपी पुलिस का कैदी वाहन) और दूल्हा को तैयार करने फूफा जी/जीजा जी (IPS रैंक के अधिकारी) जुट गए।



काफ़ी मान मन्नवल के बाद आखिरकार दूल्हा शाम के 5:44 मिनट पर निकला (ये जानते हुए की उसे पहुंचने में 24 घंटे का वक्त लग जायेगा) और अपने श्री मुख से पहली बार बोला "कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर मेरी हत्या की कोशिश हो रही है"। अतीक की जेल यात्रा तब शुरू की गई जब कांग्रेस ने अगले दिन आंदोलन का ऐलान किया था

। आगे काम स्क्रिप्ट के बिलकुल मुताबिक था। मीडिया ने माहौल बनाया की विकास दुबे की तरह गाड़ी ना पलटे... 

"गाड़ी पलट जायेगी !" "यही रात अंतिम, यही रात भरी !"  "बस आज की रात है जिंदगी !" जैसे क्या क्या प्रोग्राम समाचार चैनलों पर चलने लगे और अतीत के काफिले के पीछे दौड़ने लगी राष्ट्रीय चैनलों की गाड़ियां। अतीक कहां रुका, कितना मूता, क्या बोला मीडिया ने दिखाया तो लोगों ने खूब देखा। इन सब के बीच दब गई तो राहुल गांधी की कहानी और कांग्रेस का मुद्दा जो जनता तक सही रूप में नहीं पहुंच पाई।

BJP बेदाग है ?

इस सवाल के जवाब के लिए यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य का बयान सटीक था जिन्होंने कहा था "जो हो रहा है अब कानून के मुताबिक हो रहा"।

वैसे जो हो रहा वो अब तक तो कानून के मुताबिक ही है लेकिन जो दिख नहीं रहा... 'वो खेल और थे'।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक अतीक को लाना था। 1000 KM से अधिक का सफ़र यूपी पुलिस ने सड़क मार्ग से कर दिया ये जानते हुए भी अतीक खूंखार अपराधी था। प्रदेश के छुटभैये नेता आजकल चौपर में चलने लगे हैं लेकिन सवाल था। क्या मौहौल बनाना था। या यूपी पुलिस को चौपर अफोर्ड करने के लिए पास में पैसे नहीं थे। लेकिन मुद्दा था मनसा की, जो सरकार की ठीक नहीं थी। सरकार के पास ऐसे तंत्र हैं जो ये जानते थे की अगर अतीक को सड़क से लायेंगे तो गाड़ी पलटने का मुद्दा फिर गर्म होगा। इससे सरकार और यूपी पुलिस का खौफ अपराधियों में तो जायेगा ही मीडिया भी अतीक जैसे अपराधी की दुर्दशा दिखा कर TRP बटोरेगी। क्योंकि इस मुद्दे के सामने राहुल भी बौने हो जायेगे। इसका फायदा देखिए राहुल को घर निकला का फरमान आया है ये बहुत को तो पता भी नहीं। इतना ही नहीं सदन से सदस्यता जाने का मामला तो समझो खत्म ही हो गया।

अब सुनिए बचा हुआ जो कसर था उसका प्लान अतीक का भाई अशरफ से पूरा हो गया। मतलब शाम 5 बजे अतीक नैनी जेल पहुंच गया। ऐसा लगा की कांग्रेस के आंदोलन का मुद्दा Prime Time में उठ ना जाए इसलिए खेल ऐसी रची गई थी कि अशरफ की शिफ्टिंग भी नैनी में हो गई। अगर आज की सुनवाई के लिए एक दिन पहले अशरफ को शिफ्ट गया। फिर इस तरह देखे तो लगभग हर सप्ताह कोर्ट में पेशी के लिए महाराजगंज जेल से कानपुर लगभग साढ़े 400 किमी SP विधायक इरफान सोलंकी को भी तो यूपी पुलिस लाती है। लेकिन  बात तो कुछ और थी।

           "अतीक तो बस बहाना था "


(ये लेखक के स्वतंत्र विचार है)